Special Geet “Ghutan” By Himanshu Pandey

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Sher-o-shayari

//घुटन//

अब वो झूले न वो पेंगे न वो सावन
अब तो बाकी है घुटन,बाकी है घुटन,बाकी है घुटन|

मेघ घिरते थे बरसते थे गरजते थे
झूम के नाचते-फिरते थे हम मचलते थे
अब जरा ढूँढिए ऐसा बचपन
अब तो बाकी है घुटन,बाकी है घुटन,बाकी है घुटन|

लाज का पल्लू लिये प्रीत सुहानी कैसी
देखकर पी को ये आँखों की कहानी कैसी
अब न ऐसा कहीं आँखों का मिलन
अब तो बाकी है घुटन,बाकी है घुटन,बाकी है घुटन|

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