New Ghazal by Himanshu Pandey

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New Ghazal By himanshu Pandey

आसमां में चाँद है, है जमीं पे चाँदनी
खामुशी है नींद है और गा रही है चाँदनी

वर्क चाँदी का लगाती सम्त जिस जाए नजर
रात के चेहरे पे ये क्या कर रही है चाँदनी

दूधिया साड़ी का आँचल धार के शाने पे ज्यों
इस उफक से उस उफक तक बह रही है चाँदनी

झुरमुटों की ओट में महताब शरमाता रहा
और हौले-हौले देखो छन रही है चाँदनी

काश तुम होतीं तो कितनी और भी होती हसीं
रात पूनम की सुहानी और मेरी चाँदनी

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