Ghazal 4 by Himanshu Pandey

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Ghazal by Himanshu Pandey

इक शख्स को नजर में बसाये हुए हैं हम
अपने जिगर में आग लगाए हुए है हम


हर शै यहाँ की ऐसी कि जैसे वो हु-ब-हु
उसके शहर में शाम से आए हुए हैं हम


उसने कभी निगाह मिलाई थी दोस्तों
सबकी खबर में देखिए आए हुए हैं हम


एक रात मुझे नींद में बाहों में भर लिया
तब से असर में उसके नहाए हुए है हम


जिसकी चश्म-ए-तीर ने लूटी है जिंदगी
देखो तो उसे घर में सजाये हुए है हम

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