Ghazal 1: Kabhi to Laut kar aaye-Himanshu Pandey

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Gazal
कभी तो लौटकर आए
कभी मुड़कर के मुसकाए
किसी की याद में हमने
हजारों रात काटी हैं ।
                 कभी तो लौटकर आए ……
ये उगते सूर्य सी बिंदिया
चमकते चाँद सा मुखड़ा
झुकाकर शोख आँखों को
जरा फिर से वो शरमाए ।
                 कभी तो लौटकर आए ……
की हो वो बाग फूलों का
महकती सांस की माला
कि शबनम सुर्ख चेहरे से
झटककर मुझपे बरसाए |
                कभी तो लौटकर आए ……
हवा के दोश पे आँचल
कि जुल्फों के घने बादल
कि जिसमें डूब जाऊँ मैं
जरा फिर से वो लहराए |
                कभी तो लौटकर आए …….

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