सितमगर तुम्हारा बहुत शुक्रिया-Geet by Himanshu Pandey

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Geet

जो मैं हूँ, न होता, अगर तुम न होते

सितमगर तुम्हारा बहुत शुक्रिया है || 


ये चेहरे पे झुर्रियों से लिक्खी कहानी

सफेदी की टोपी लगाए जवानी

गुजरती मगर कब इसे देख पाते

अगर तुम न होते, अगर तुम न होते

सितमगर तुम्हारा बहुत शुक्रिया है ||


 कड़ी धूप है जिस्म झुलसा हुआ है

जवाँ महफिलों में भी तन्हा हुआ है 

ये नायाब मौसम न आसान होते

अगर तुम न होते, अगर तुम न होते

सितमगर तुम्हारा बहुत शुक्रिया है ||


निगाहों को आती जुबां और भी है 

जहाँ में तुम्हारे सिवा और भी है 

न होता यकीं गर ये आलम न होते

अगर तुम न होते, अगर तुम न होते

सितमगर तुम्हारा बहुत शुक्रिया है ||

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